कर्ण
सूर्य पुत्र था वो, सूत पुत्र कहलाया था , कुन्तीनिय था मगर, राधे को वो प्रिय था । सोने सा था तन उसका, अभेद्या उसका आंग था , इंद्र मांगा भीख जिसे, ऐसा वो क्षत्रिय था । जिसे श्रेष्ठ बन्ना था , वह उसका ही तो प्रिय था , बस एक ही मजबूरी थी ,वह वचनों का सोखिन था। अगर ना देता वचन कुंती माता को , पांडवो के खून से वो धोता अपना साथ को । -Ashü
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