उम्मीदें...
आज तन्हाई से यूं खोया यादों में ... मैं विराजमान तो था कुर्सी पर, फरमाइश हुई इस तन की , जीवन के संग एक लंबी यात्रा की ... अंगड़ाइयां लिए कुछ पल , यादों में देखा उसके संग , अपना कल ... कि , कल्पनाओं में ही सही..... मैंने पूरा जीवन , साथ दिया उसका यूंही .. वास्तविकता मैं तो , ये सब एक आश है ... वो उम्मीदें जो उसे , और अपनो की मुझ से है, ओर मुझे ये सभी उम्मीदें , अपनी कल्पनाओं से ... कल बेहतर हो , ये एक कल्पना और आश है ।। हां मैं भी उन सभी खुशियों को पाने की चाह रखता हूं, इसलिए दाव पर कल लिए , आज का पल....
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