नारी शक्ति
नारी हाँ मैं नारी हूँ हाँ मैं सब पर भारी हूँ, नजर उठा कर देख जरा मैं जलती चिंगारी हूँ.. वो दौर गया जब मुझे अभिशाप बताया जाता था, कुचल कर मेरी अभिलाषा मुझको दबाया जाता था.. कला,खेल सेवा सब में हमने देश का मान बढ़ाया है, पीड़िता नहीं योद्धा हूँ यह सच कर के दिखलाया है.. रगों में दौड़ता खून मेरे है झांसी की रानी का, झुकना ना था स्वीकार जिन्हे ऐसे अमर बलिदानी का.. अबला नहीं सबला हूँ मैं भारत की शान हूँ, जिनको है कद्र मेरी मै उनकी अभिमान हूँ.. खुद से क्या बताऊं मैं क्या है मेरी पहचान, बेटी,बहन,बहु, माँ अनगिनत हैं मेरे नाम.. कभी गृहणी बन करती हूँ घर की रखवाली, दुष्टों का वध करने को मैं ही बनती दुर्गा काली.. नारी का करते सम्मान जो मैं उनकी आभारी हूँ, नारी हूँ मैं नारी हूँ हाँ मैं सब पर भारी हूँ..!!
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