शराबी और बीमारी
शराब और बीमारी जिस पर हो गई हावी । उसकी जीवन की घूम जाती है चाबी ।। फिर चाहे जितने भी लगा लो बंदिशें के ताले । फिर कोई उसे नहीं खोल पाते।। हंसता हुआ घर मिनटों में मौन हो जाता है । जब कोई अपना इन छड़ों से गुजर जाता है ।। देखते ही देखते तालाब समंदर बन जाता है । तैरने वाला इंसान अचानक उसमें डूब जाता है।।
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