सुनरी
एक पवन की अगन सी तू बहती जा, अपने लङकपन की स्वपन सी तू खिलती जा, एक दिन तेरा भी वक्त आएगा, तुझे ये जग सजायेगा, अपनी ही राग मे ये तुझे सरहायेगा, कोई अपना भी तेरा नाम भी गुनगुनायेगा, सुनरी ऐ पवन, तू इसे दे सपनो की उङान, सुनरी ऐ पवन, तू इसे दे धङकनो की पहचान ।
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