गजल
एक गजल आप हमसे वफा निभाओगे छोड़ कर तुम कहीं न जाओगे तुमसे वादा यही सदा मांगू हमको अपना सनम बनाओगे प्यार ही प्यार मुझको देना तुम दिल कभी भी नही दुखाओगे गर कोई गैर तुमको भा जाए बात ये भी मुझे बताओगे हाथ तेरा उसी को सौंपेगे मुझसे तुम कुछ नही छुपाओगे चांद तारे भी तेरे आशिक है आप छत पर कभी न जाओगे सारे जुगनू लिपट के मर जाएं चांदनी रात जो तुम नहाओगे गम के बादल तुम्हे रुलाए जब पास हमको सदा ही पाओगे दिल में "सागर" तेरे समाया है हमको कैसे सनम भुलाओगे गोपी डोगरा "सागर"
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