“मैं एक शिक्षिका हूँ🇮🇳🇮🇳
“मैं एक शिक्षिका हूँ” मैं एक शिक्षिका हूँ, ज्ञान की दीप जलाती हूँ। अंधेरों से भरी राहों में, बच्चों को मंज़िल दिखाती हूँ। कभी माँ बनकर समझाती हूँ, कभी गुरु बनकर राह दिखाती हूँ। देश के उज्ज्वल भविष्य को, अपने हाथों से सजाती हूँ। मेरी किताबों में सपने हैं, मेरी बातें हौसला बनती हैं। मेरे शब्दों से ही बच्चों की, नई कहानी बनती है। मैं नारी भी हूँ, शक्ति भी हूँ, मैं ही कल की पहचान हूँ। हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की, मैं ही पहली उड़ान हूँ।
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