आँसु
क्या दुख है समुद्र को बता भी नही सकता, आँसू की तरह आँख तक आ भी नही सकता। तु छोड़ रहा है तो खता इसमें तेरी नही, हर शख्स मेरे साथ निभा भी नही सकता। प्यासे रह जाते है जमाने के सवालात, किसके लिए जिंदा हु बता भी नही सकता। घर ढूंढ रहे हैं मेरा रातों के पुजारी, मै हु की चिरागो को बुझा भी नही सकता। वैसे तो एक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए, ऐसे कोई तूफान हिला भी नही सकता।
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