हकीकत
उम्र जन्म के साथ ही घटना शुरू हो जाता है और हम कहते है कि बड़े हो रहे हैं. जब हम छोटे होते है तो सोचते है कब बड़े होंगे. जब बड़े हो जाते है तो सोचते है काश फिर से बच्चा बन जाते. उम्र के अंतिम पड़ाव बुढ़ापे से हर कोई दूर रहना चाहता है. उम्र बढ़ती है बच्चे से जवान होते हैं. जिम्मेदारियाँ बढ़ने लगती है और ख़ुद को परेशान पाते हैं. उम्र बढ़ने का साथ साथ तजुर्बा भी बढ़ने लगता हैं. जिंदगी और दुनिया की हकीकत समझ में आने लगती है!
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