छोटी उम्र का तजुर्बा
उमर मेरी छोटी हैं पर तजुर्बा मोटी हैं निकल जाते हैं लोग आपको छोड़कर जहा आपको को कुछ पता न हो,रास्ते के उस मोढ़ पर अपने रास्ते को मोड कर। पर निकला हूं मैं फिर से खुद को जोड कर । ध्यान रहे कि यहां हर वो शख्स पराया है जिसको आपने अपना बनाया है। लोगो को यहां मैने जाना है जो खुद को समझाना है यहां कब और कौन बदल जाएगा ये आपको समझ नही आएगा यहां नही लोग अनमोल यहां हैं पैसे का तोल पर हमे फर्क नही पड़ता इन सबसे क्यूकी समझ गया हू सब मैं कबसे नही रखना है ज्यादा किसी से वास्ता इसलिए बदल लिया है खुद का रास्ता। जो आपको लगते सच्चे हैं दरअसल वो अभी बच्चे हैं। पैसे की कमी भी बनती है सपनो मे बाधा जिसको नही करूंगा मैं सांझा भले ही मेरे डगर कच्चे हैं पर इरादे मेरे पक्के है।
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