अंतिम रहस्य
जिंदगी के मंजर भी कितने अजीब है, एक पल रोशनी, तो दूसरे शरण अंधकार। बचपन की हसी जिस गोद में खुली थी वो ना जाने कब हमारे अरमानों के लिए छोटी पढ़ गई। जिन हाथों से सूजकर बड़े हुए वो वक्त के दौर में बहुत पीछे छोट गए। देखते ही देखते यादों का वो पिटारा नजर से इतना दूर हो गया कि हमेशा के लिए खो गया।
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