गझल : रूसवा हम पर
रूसवा हम पर अक्सर आप करते आ रहे है हम किसको सुनाएं मन की बात, दबाते जा रहे है हर दीन का मामला है कैसे चलगा संसार यु ही आप के प्यार मे मुस्कुराते, हम जा रहे है हम अपनी मुस्कान को निछावर करता हूं आप तो मुस्कुराते बात करने से, टाल रहे है ये जिंदगी खुशहाल जीवन जीने के लिए है खुशहाल बनकर क्यूं खुद से, निछावर हो रहे है सारी उम्मीदें आप पर निर्भय करती है सनम आप तो हमारी जान के पीछे ही,भाग रहे है धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२
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