पहले हम
पहले हम एक ही शहर में रहते थे अब अलग अलग शहरों में बस गये हैं शहरों के बीच इतनी दूरियां थी कि उसे डाकना कठिन काम था इसलिए हम चिट्ठियों के कबूतर उड़ाने लगे और उसके लौटने का इंतजार करते थे डाकिए हमारे सबसे अच्छे दोस्त बन गए थे वे आते तो चेहरे पर चमक बढ़ जाती थी मोबाइल -युग आने के बाद हम आवाज से एक दूसरे को पहचानने लगे मोबाइल नम्बर नही याद रहते थे लेकिन आवाज याद रहती थी अच्छे दोस्त गालियों के साथ बात करते थे और उनको उसी भाषा में जबाब मिलता था जो सभ्य थे उनसे बातचीत करने में मजा नही आता था उनका लहजा बदल चुका था हममें से जो हाकिम बन गये थे वे पहले जैसे नही रह गये थे वे अपना रोब दिखाते थे हम ऐसे लोगों को ठेगें पर रखते थे अफसरी और दोस्ती साथ साथ नही चल सकती थी इसलिए हमने उन्हें बेरहमी से दोस्तों की सूची से बर्खास्त कर दिया था वे हमारे लिये पलिहर के बानर बन चुके थे
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