सोरठा
:प्रकृति जो दे जीवन दान, प्रकृति को नहीं छेड़ना। इसका हो सम्मान, पूजा कर सब अनवरत।। प्रकृति से छेड़छाड़, मनुज नहीं अब कीजिए। जंगल नदी पहाड़, नहीं करो इसका क्षरण।। प्रकृति महा वरदान, जो है धरणी रक्षिता। जो दे सबको जान, उसका हो पूजन नमन।। रखना इसका ध्यान, प्रकृति साँस की दायिनी। करो नहीं नुकसान,प्रकृति बचा रखना सतत।। नरेंद्र सिंह
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