शांति काल
मन में चल रही हलचल को नदिया में डूबकर, पूरी दुनिया से नाता तोड़कर, ध्यान लगा दिया है वीर सिपाही ने चैन की सास लिए सिर्फ मंजिल की ओढ भरते रहने पर। न किसी गपशप में दिलजसबी और ना ही ध्यान भटकने वाले सुनहरे रास्तों का लालाज। दिख रही टोह सिर्फ मछली की वो आंख, जिसको इस बार आजमाकर ही रहना है।
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