भुज गई बत्तियां और चाहे गया मेरे बेचैन दिल पर घनघोर अंधेरा। अतिथ पीछे छूट ना रहा, और भविष्य साफ दिखाई ना दे रहा। है तो बस आज जिसमें हर पल अगले शरण की बेबसी छाई है।