उड़ान
पिंजरा छोड़के निकल पड़ी एक नाजुक चिड़िया सागर की गहराइयों में अपना वजूद खोजने। कभी आसमान की ऊंचाइयों को छू जाती और कभी हौसला हार नैन गीले कर बैठती। मगर चुनौती चाहे जो हो अपने मंजिल के रह से ना कभी उसकी नजर चूंकि ना ही कदम डगमगाए।
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