तुम
तुम मेरी जिन्दगी का वो हिस्सा हो जिसे मैं कभी गवाना नही चाहती मगर ये भी सच है कि अब तुम्हें पाना नही चाहती। दुआ,इबादत, इलतजा सब तेरे ही हक में करती हूँ मगर ये भी सच है कि अब तेरे बगैर मुस्कुराना नही चाहती। पूछते है लोग सबब मेरी खामोशी का वो तुझे गलत न समझे इसलिए किसीको बताना नही चाहती तू मेरी जिन्दगी का ऐसा हादसा है जिसे मैं भूलाना नही चाहती। मीरा सिंह
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