मगही दोहा
भारत में अब जल्दिये, गिनल आदमी जात। एगो कॉलम में रहत,भासा के भी बात।। भासा लिखिहs तू सभे, मगही माय महान। मगध पूत कहलाय के, अच्छा मौका मान।। ठानs आझे तू सभे, मगही गिनती होय। अप्पन भासा लिख दिहs, रहिहs नै तू सोय।। पावत मगही मान तब, गिनती सच में होत। हम्मर बतिया मान लs , एकर जलतो जोत।। मगही असली पूत जे, करइ मगह से प्यार। ऊ तो अभिये से करs, एकर तू परचार।। नरेंद्र सिंह,मोहनपुर, अतरी, गया 06.05.2025
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