छंद-- सरसी
परिचय - (27 मात्रा) सममात्रिक छंद पदांत- गुरु लघु (21) यति-- 16,11 शीर्षक-- सदा रहो गतिमान। मानव थककर कभी न बैठो, सदा रहो गतिमान। चलते-फिरते उद्यम करना, यही सीख लो ज्ञान।। करता श्रम सुन्दर जीवन भर, होता उसका नाम। शीघ्र त्याग दो सुस्ती मानव, करो सदा ही काम।। सभी संत ज्ञानी हैं कहते, यह जग कर्म प्रधान। मानव थककर कभी न बैठो, सदा रहो गतिमान।। ऑंखें अपनी खोलो देखो, जितने हैं धनवान। धनी बने अपने बलबूते, बनी अलग पहचान।। द्वेष जलन को त्याग करो सब, रहे कर्म पर ध्यान। मानव थककर कभी न बैठो, सदा रहो गतिमान।। जैसी करनी वैसी भरनी, यही जगत की रीत। जितना करता उतना पाता, मानो इसको मीत।। उत्तम कर्मो के बल पर ही, बनो सफल इंसान। मानव थककर कभी न बैठो, सदा रहो गतिमान।। नरेन्द्र सिंह
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
