रिश्ता
कभी-कभी कोई इंसान यूँ ही ज़िंदगी में आ जाता है, और बिना शोर किए दिल के सबसे करीब हो जाता है। न कोई वजह समझ आती है, न कोई हिसाब होता है, बस उसका होना ही खास लगने लगता है। उसकी बातें सुकून बन जाती हैं, उसकी हँसी आदत सी हो जाती है, और दिल ये सोचने लगता है — क्या ये रिश्ता हमेशा रह सकता है? मन करता है उसे सिर्फ पसंद न करूँ, बल्कि उससे एक रिश्ता बनाऊँ, ऐसा रिश्ता जो नाम से नहीं, दिल से जुड़ा हो। जहाँ भरोसा हो, अपनापन हो, और साथ निभाने की चाह हो, जहाँ दूरियाँ भी रिश्ते को कमज़ोर न कर पाएँ। कभी-कभी सच में कोई इतना अपना लगने लगता है कि उससे हमेशा जुड़े रहने का मन करने लगता है…
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