प्रसिद्धि
हर कोई प्रसिद्धि प्राप्त करने में लगा है कुछ ठहरा हुआ किस्सा करने में लगा है तस्वीर खिंचवाएंगे ख़ुद में सोचने लगा है अधूरा छोड़ मंजिल में झूठा होने लगा है आसक्त परिस्थिती में निर्णय लेने लगा है संपूर्ण मन में तूफ़ान उठाने लगा है अमीर चाहत में रिश्ते भूलने लगा है अय्याश चाहत में बवाल करने लगा है कल्पनाओं में लालच भरने लगा है सिमाबध्द खेल में बिखरने लगा है
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