आज का मानव 🙏
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान 🙏🙏 अहम् भाव मे जीता मानव, ना समझ है, ना सम्मान झूठी शान दिखाता है, करें सदा खुद का गुणगान कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान 😊🙏 बिना स्वार्थ कोई काम ना करता, दूजा करे तो टांग अड़ाए😔 करता सदा है वो मनमानी, अहंकार का नशा चढ़ाये 👌 ओढ़के चादर लालच की, सो गया उसका ईमान कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान 👏👏 उल्लू सीधा करके अपना खुद को भला दिखाता है चिकनी चुपड़ी बातों मे सबको वो फंसाता है 😔 मात पिता की बात ना सुनता, करता नारी का अपमान 🤵♀️🧕 अहंकार है इतना ज्यादा, भूल गया सबका सम्मान 😞 कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान👏👏 काम ना करता, ना करने देता, करता हर काम का बंटाधार 😊😊 छल और कपट की आदत मे गुम हो गए हैँ संस्कार 👌👌 आज का मानव बड़ा बेढंगा, खुद को समझे वो महान 😊 जीत की होड़ मे होके पागल, वो भूल् गया भगवान कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान👌🙏🙏
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
