अन्तिम सफर
शीर्षक - अन्तिम सफर इस अंतिम सफर में , मै यादों को समेटे हुए घर को लौटता हूं पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगता है इस अंतिम यात्रा के , अंतिम सफर में मै कुछ तो खो रहा हूं कोई नहीं मै यादों के सहारे जी लूंगा हे मेरे प्रिय मित्र याद आएगी उन पलों की सफर के दौरान , साथ में भोजन करना नम आंखों से अंताक्षरी खेलना याद आएगी हर पल साथ बिताए पलों की मित्र मैं नम आंखो से धनबाद में कैसे अलविदा कहूं जी चाहता है कि लिपट कर रो लू कुछ देर लेकिन जब फुर्सत मिले उन पलों को याद करके रोऊं या मुस्कुराऊं मित्र आप ही बताओ मै क्या करू मनोज सोरेन ✍️✍️
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