इंतेज़ार
हो सके तो पलटकर हंसना प्रिये पग मेरी गली में जब रखना प्रिये हो सके तो पलटकर............!! चारों पहर बस तेरी आरज़ू है सुध बुध गवाकर तेरी जुस्तजू है है बस इल्तिज़ा दिल में रहना प्रिये हो सके तो पलटकर............!! पागल सा दौड़े,दीवाना ये दिल हुआ बावरा है,ये नादां सा दिल है गुज़ारिश सदा दिल में रखना प्रिये हो सके तो पलटकर............!! आज भी रात में चांद छत पे है आता मुझे ये जलाता,आंसुओं में डुबाता ब्रज में प्यार का दीप रखना प्रिये हो सके तो पलटकर............!! राजीव
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