तू मत आया कर
आज आसमा में मैंने चांद को देखा उस चांद को देख मुझे उस चांद की याद आ गई जो चांद रातभर मेरी छत में रहकर मुझे मीठी नींद सुलाता था और मुझे देखकर खुद चला जाता था। हे चांद ! मेरी इस छत में मत आया कर क्योंकि जब भी तू आता है तू हर वह चेहरा याद दिलाता है जो चेहरा अपना होकर भी अपना न हो पाया है हे चांद! मेरी इस छत में मत आया कर
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