अरावली
गुंज रही है लाखों की किलकारी रहे जहां करोड़ों की आबादी जिसने थामा है करोड़ों की जान की बाजी जो तूफान बाढ़ और आंधियों से करती हमारे रखवाली जो लोग समझ नहीं पाए अपने सांस की कीमत वह क्या करेंगे औरावली पर्वत की रखवाली. हम हैं उन पशु पक्षी जीव जंतुओं के साथ जिसने सजा रखी है पृथ्वी की हरियाली करोड़ों वर्षों से करती हम सभी की रखवाली. जहां गुज रही लाखों की किलकारी वही है अरावली पर्वत मेरे भाई. पहाड़ी बचाओ देश बचाओ पेड़ लगाओ जीवन पाओ
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