अधूरी ख्वाहिशें और अधूरी खुशी
पूरी हो भी ख्वाहिशें, अब ख्वाहिशें पहले सी होती क्यों नहीं...... है खुशियां भी अब मुमकिन जहां की , अब पहले सी खुशी होती क्यों नहीं......... है न मंजूर अब की ख्वाहिशें, न मिले अब की खुशी........ कह दो वक्त से , गर हो मुमकिन तो लौटा दे पहले की नादानियों से भरी , अधूरी ख्वाहिशें और अधूरी खुशी//
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