डर
पल-पल खौफ में जी रही हो, बेहतर तुम ख़ुदको मेरे हवाले कर देते वो बदतमीज हमें जुदा करना चाहता है, बेहतर हम मिलकर उसका काम मुश्किल कर देते मै शराफ़त की दुनिया में ख़ुदको अब अपंग महसूस कर रहा हूं, बेहतर मुझे इस कैद से आजाद कर देते तुम्हारी खुशी मेरी ज़िन्दगी से कही ज्यादा कीमती है, बेहतर तुम भी ये हक़ अदा कर देते
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