शीर्षक:जुआ नैय खेल रे बाबू
छोड़ रे बाबू जुआ खेलना, अइसन लत अप्पन सुधार। बिकतौ घर के माल-पतर, फूँक देमहिं ले करजा उधार।। पांडव से कुछो सीख ले तू, जे हारल हल मेहरी-राज। तू कउन खेत के मूली ह ही, ई करम छोड़ कर अछा काज।। आउ संभर तू कुँवार वार ह त, नइतो चढ़तउ न खगड़ा माउर। लगतउ हमर बतिया भले बुरा, पर तू कहइमs बगड़ा बाउर।। बाजी के लत तयाग रे बाबू नैय कर अप्पन जिनगी तबाह। हाथ मलते रह तू पछतइमs, कर भविस के तनी परवाह।। नरेंद्र सिंह, गया
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