🌸 "तो कहना"
तुम उठो; तुम्हारा हाथ न थाम लूँ, तो कहना! तुम चलो; तुम्हारा हर कदम पर साथ न दूँ, तो कहना! तुम लिखो; तुम्हें कागज-कलम लाकर न दूँ, तो कहना! तुम गाओ, मैं तुम्हारा स्वर न बन जाऊं, तो कहना! तुम प्रेम करो, स्वयं को न्योछावर न कर दूँ, तो कहना! लेकिन मुझे चूमने से पहले तुम सोच लेना, कि मैं सम्पूर्ण चेतना, संवेदना से भरा एक मनुष्य हूँ, कामनापूर्ति की कोई निर्जीव मशीन नहीं! अगर प्रेम की दृष्टि न हो तो ये दुनिया इतनी भी हसीन नहीं!!
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
