पुरुषोत्तम राम
अयोध्या धन्य थी हुई, जन्मे थे जब राम, मर्यादा प्रभु राम को, मेरा कोटि प्रणाम। कौसल्या की कोख से, लिए राम अवतार, चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी, आये तारनहार। मनुज कल्याण हेतु ही, धरे थे मनुज रूप, न्याय प्रिय,सरल,सहज थे,भले जन्मगृह भूप। स्व आचरण आदर्श से, बने पूज्य भगवान, कण-कण में ये व्याप्त हैं,पूजे इन्हें जहान। जब जब धरा पर बढ़ता,अत्याचार- कुकर्म, तब तब प्रभु आते धरा, मिटाते तब अधर्म। नरेंद्र सिंह 17.04.2024
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