संसार के रूप
मैं दुनिया को देखा देखें कुछ सांप रेंगते हुए घुनें हुए बीज के दानों को चुगते चूहे हतोत्साहित खरगोश , एकाग्र बगुले , आत्म मुग्धता में खोई मछलियां , रेस के घोड़े और ऊर्जा विहीन सिंहों को सभी में भूख समान थी । जिन्होंने भोजन पा लिया वो उस ऊर्जा शक्ति में बह गए कालांतर में अपने समुदाय के नेता हुए जिन्हें अब याद भी नहीं की पेट की अग्नि ने उन्हें भी तपाया था । जो भूखे बचे लाचार कहलाए।। विक्रम सिंह यादव VIKRAM SINGH YADAV
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