बेटी🤵♀️
कैसी परंपरा और........ कैसा विधान हैँ..😔 कैसी परंपरा और........कैसा विधान हैँ..😔 बेटी के लिए इस धरा मे कौन सा जहान है🤔 होते ही विदा घर से, वो हो जाती परायी 🤵♀️ ससुराल मे सुनती वो, पराये घर से है आई😒 बेटी थी जिस आंगन की, कहलाती अब मेहमान है बेटी थी जिस आंगन की, कहलाती अब मेहमान है ........कैसी परंपरा और........कैसा विधान हैँ...... 😭 कैसा है जमाना, ये कैसा इसका तर्क है....😭 दोनों जिगर के टुकड़े हैँ करते फिर भी फर्क हैँ अपने ही खून के लिए हम, इतने क्रूर क्यूँ बेटे को रखते दिल मे, बेटी घर से दूर क्यूँ 😒 अपनी ही औलाद के लिए बन जाते पराये कैसा है जमाना, ये कैसा इसका तर्क है.... हिम्मत से आगे बढ़कर पहल क्यूँ नहीं करते 😔 ऐसी परंपरा मे बदल क्यूँ नहीं करते बात करते करते मेरी आँख भर आई, बाबुल को मेरे, फिर भी, मेरी याद ना आई कैसी परंपरा और........ कैसा विधान हैँ..😔 कैसा है जमाना, ये कैसा इसका तर्क है....
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
