वो बचपन
अब छूटेगा वो घर आंगन जहां बिताया प्यारा बचपन । चिड़ियों की चहचहाहट सा चहके बन बसंत फूलों सा महके । कितना प्यारा था वो बचपन अब घड़ी बिछड़ने की है आई मन में अश्रु घटा है छाई। नहीं पता था छोड़ ये घर और कहीं बस जाना है नए रंग और नए ढंग में जीवन वहीं बिताना है। आयेगा एक दिन वो ऐसा जब नया नया सबेरा होगा बदल पुरानी दुनिया सारी नई जगह ही डेरा होगा। मां ,पापा,भाई , बहनों से सबसे दूर हो जाना है नई जगह पर नई नई निज सुंदर छवि बनाना है । हां बचपन में था एक सपना सजकर दुल्हन बनने का नहीं पता था क्या होता दुःख अपनों से बिछड़ने का पापा भी अब हैं प्रयासरत दुनिया मेरी बदलने को जो रहते थे हर पल बेमन कहीं भी एक दिन रुकने को अब छोड़ के ममता का वो आंचल बचपन का वो प्यारा आंगन सबसे दूर हो जाना है घर आंगन वो नया मिला जो सुन्दर उसे सजाना है नए रंग और नए ढंग में जीवन वहीं बिताना है।
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