पाणी रे पाणी तेरा रंग कैसा
पाणी रे पाणी तर रा रंग कैसा ============================= सुष्ठी की सारी देन तो नीराली है, ऊसमे से एक पाणी है, मानव का सारा जीवन ईसपे, निर्भर है। ना मीले पाणी तो हर जीव, तरस जाये, जादा देर हो जाये तो फीर, शायद ईन्सांन क्या....., हर जीव भी मर जाये। फिरत बडी बेकार है, यहा हर ईन्सांन की, खाने से पहले पाणी दारु मे मीलकर, नशे के लिये पीता है, तो खाने के बाद पाणी, जीवन बचाने के लिये पीता है। घुलमील जाना आदत है, पाणी की...., ईसी लिये सब मे मील जाता है। मगर आपना सफाई का काम, वो हर हाल मे करता है. कचरा कुडा मैल दालकर भी..., वो गंदा नही होता। सब मे घुलमीकर भी आपना रंग नही बदलता. ईसी लिये तो कहता है हर आदमी, पाणी रे पाणी तेरा रंग कैसा.., पाणी रे पाणी तेरा रंग कैसा.। =======================
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