जयकरी छंद/चौपई छंद
शीर्षक- गीत और मीत उर से निकले,तो संगीत। दो दिल मिलता, होती प्रीत।। गीत प्रीत है, जीवन-अंग। बना रहे यह, हरदम संग।। छंद राग से,बनता गीत। प्रेम भाव से, बनता मीत। दोनों जिसमें, रहता व्याप्त। उसे जगत में, अति सुख प्राप्त।। जिसे प्राप्त हो, सुरलय राग। उसको मिलता, उत्तम पाग।। जिस पर गणेश, देते ध्यान। मिलता उसको जग में मान।। मित्र अगर हो, सच्चा खास। वह नर न कभी, रहे उदास।। परम मित्र हो, अगर सयान। चाल चलन पर, रखता ध्यान।। नरेंद्र सिंह,गया
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