कुछ और है
दिलकशी का समां कुछ और है, मोहब्बत-ए-वारदात का मजा कुछ और है । इश्क की नुमाइश नहीं होती यारों, इश्क में हार की सजा कुछ और है । इश्तिहारो में छपे ऐसी बात नही जानता पर जानता हूं, इकरार का लहजा कुछ और है। हर किसी का अपना नशा होता है, पर प्यार में दिल्लगी का नशा कुछ और है। दिल की बात जुबां पे आती है, आंखों से कहने की अदा कुछ और है । प्यार में हार जीत नहीं होती , बेकरारी में करार की दवा कुछ और है। दीवानगी में,बेखयाली में खयाल आते हैं, मोहब्बत में इंसान की दशा कुछ और है । - Dasariya DR शब्दार्थ- लहजा=गाने या बोलने का ढंग दिलकशी = चित्कर्षक , मनमोहक मोहब्बत-ए-वारदात=प्रेम का स्थान, प्यार की घटना
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