दो पल अपने नाम
चलो आज दो आसू अपने लिए बहाए। सदियों से चलते ही जाने का फल दो पल थामकर आज़मा तो ले। टूटकर बिखरने का विकल्प ना हमारे पास कभी था और ना ही कभी होगा पर दो शरण रुककर अपने इस चिंतित मन को समझा तो ले कि उसके हर वक्त हिम्मत बांधे रखने से हम कहा से कहा पैच गए।
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