सपना
असमतल सड़कों पर धक्के खाते ऑटो पर उपर नीचे होते मेरे सपने, 9:30 से 4:30 की नौकरी में पीछे छुटते मेरे अपने। फिर भी लड़ना और ख्वाबों को पालना, कुछ यूँ खुद को संभाल रही हुँ मैं, आँखों में ख्वाब मेहनत से पाल रही हूँ मैं।।
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