देश की वर्दी, शिक्षक के पद ...
वो देश की वर्दी में… वो देश की वर्दी में सरहद पर खड़ा है, मैने कक्षा की चौखट पर भविष्य गढ़ा है। वो बंदूक थामे दुश्मन से लड़ता है, मैं कलम उठाकर अज्ञान से भिड़ती हूं। वो सीमा की रक्षा करता हर पल, मैं संस्कारों की नींव को सींचती हूं। वो ठंडी रातों में जागता है, मैं सपनों को जगाती हूं बच्चों की आंखों में। वो मिट्टी के लिए जीवन अर्पित करे, मैं उसी मिट्टी के वीरों को गढ़ती हूं पाठों में। उसकी वर्दी तिरंगे की शान है, मेरा दुपट्टा भी राष्ट्र का मान है। वो गोली से देश बचाता है, मैं ज्ञान से देश सजाती हूं। वो देश की रक्षा सीमा पर करता है, मैं शिक्षक के पद पर आत्मा की रक्षा करती हूं। हम दोनों का उद्देश्य एक ही है — भारत को सशक्त और उज्ज्वल बनाना। जय हिंद 🇮🇳✨
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