पहाड़ की राह
"अपने जीवन मे पहाड़ रूपी चुनौती को देख पर्वतारोही मन ही मन चोटी पर पहुंचने की कल्पना करते हुआ..." हर समस्या का हल होगा, वह आज नहीं तो कल होगा। माना कि मंजिल आगामी है, चुनौती विशाल पर्वतसी नामी है, सफर बड़ा दूरगामी है, हाथ आई सिर्फ नाकामी है, पर कर्म यदि अगर सच्चा है तो, कर्म कहां निष्फल होगा। हर समस्या का हल होगा, वह आज नहीं तो कल होगा।। माना थक कर चूर है, मंजिल की तलाश में अपनों से अब तो दूर है, अब तो पर्वत से छोटे मन के ये गुरुर है, उस चोटी कि चाह में अब मझधार में जरूर है, पर इन सब जीवन की समस्याओं, में अंत कहाँ अब होगा। हर समस्या का हल होगा, वह आज नहीं तो कल होगा।। सूरज जैसा दिखना है तो सूरज जैसा जलना होगा, नदियों सा आदर पाना है तो पर्वत छोड़ निकलना होगा, जग को रोशन करना है तो दीपक सा संघर्ष करना होगा, निरंतर आगे बढ़ना है तो समय के रथ सा चलना होगा, पर जीवन की इनसब आपाधापी, में रुकने से कहाँ अब फल होगा। हर समस्या का हल होगा, वह आज नहीं तो कल होगा।। अग्नि सी अंगारो वाली राहों पर शाशितल चंद्रमा सा रहना होगा, हर कष्टमय राहों पर सब्र के बाँध से मन को बंधना होगा, हर गिरते मंजर पर गहरे लगते खंजर पर तुम्हें तारों सा चमकता अंबर रहना होगा, खाना है जो यदि मीठे फल तो कुछ कड़वे बेरो को चखना होगा, अरे हम आदम के बेटे हैं क्यों सोचे राह सरल, पर ज्यादा वक्त लगेगा मगर संघर्ष सफल होगा। हर समस्या का हल होगा,वह आज नहीं..
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