अल्फाज
जरा देर ठहरे तो,बहुत देर हो गई खुशहाल थी जिंदगी गमगीन हो गई..... वक्त की पहिया चलती गई बादल फिर से घनघोर हो गई..... बूंद बूंद अश्कों से सजाया था दामन, शहर में रुसवाई की शोर हो गई.. कुछ इस कदर तड़पाया उसने , की अब मोहब्बत से नफरत हो गई ..
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