बधाई क्यों
आज बधाई कोई न देना , यह शुभदिन नहीं कोई मेरा। आखिर यूँ नाचना गाना क्यों नहीं है प्रथम दिवस जब तेरा।। अगर तुम मुक्त हो गुलामी से, मुझे कोई बधाई न देना। इस अंग्रेजों के चोचले से, मुझको कुछ नहीं देना-लेना ।। सनातन पर मुझे पूर्ण आस्था, ईसाइयत से क्या है लेना। मेरी असीम संस्कृति भक्ति को, कट्टरपंथ नाम नहीं देना।। आज बधाई कोई न देना। आज बधाई कोई न देना।। नरेंद्र सिंह, अतरी 31.12.2024
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