जने देखे रस
जिनगी में जे भी आबs हे कुच्छ-कुच्छ सीखा के जा हे। कोय झिटे तनी-मनी, कोय तो चुना लगा के जा हे।। काम निकाले घड़ी देखs, कलेजा से ऊ चिपकs हे। कममा सधला पर देखs, अंगूठा दिखाके खिसकs हे।। जखनी कुछो काम रहे त हाजिरी दिने रात लगाबे। चंदन टिका लगा के फिन, ऊ राह बदल आबे-जाबे।। काम पड़ला पर अदमी के, गधो के बाप बनावल जाहे, जे बाप नै हे काम के तो, बाप गधा गदानल जा हे।। ई कलजुग में अब भारी, ई बीमारी बनल जा हे। जने देखलक रस ओने, जाके लोग सटल जा हे।। नरेंद्र सिंह, 05.05.2025
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