संदेह
संदेह ======================= संदेह करो ऊन पर, जो गरीब बणकर तुम्हे वोट मांगकर, खुद एक पंच वार्षिक मे, आमीर बण जाते है. तुम्हरे भरोसे पे सब ऊनका, फीर वो बडे कैसै बण जाते है, संदेह करो ऊनपर, जो बिना काम किये ही , लक्झरी लाईफ जीते है. देश को लुटकर ये गुंडे, राजनीती मे आपनी धौंस जमाते है, संदेह करो ऊनपर, जो गरीबोका खुन चुसते है. संदेह करो ऊनपर, जो राजनीती गरीबोकी सेवा करने आकर, जो एक फकीर से...., मालदार कैसै बणता है, मालदार कैसै बणता है. ==================
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