खुद को खोना..।।
कभी कभी हम खुद को खो देते है, ये सोच कर की लोग कया कहेगे, लोग कया सोचेंगे..!! हम लोगों को importance देने मे एक दिन खुद को ही खो देते हैं।। कभी कुछ पाने की ज़िद्द की वजह से, तो कभी कुछ बेमतलब निभानें कि वजह से, औरो के लिये अपने सपने भी तोड देते है, किसी को सिर्फ पाने की चाह मे, हम खुद को खो देते है...।। कभी किसी कि ख़ुशी के लिये, अपने गम भी छुपा लेते है.. पता नही ऐसा भी कया पाना होता है, की खुद को खुद से ही जुदा कर लेते हैं..।।। सही गलत के मायने भी भुल जाते है, अपने ही उसूलों की अहेमियत कम कर देते है.. सिर्फ किसी एक के लिये , बाकी रिश्ते-नाते छोड़ देते है.. किसी को खुश करके, अपना दर्द खुद मै कैद कर लेते है.. फिर खुद की खुद को पहेचान ही नहिं होती..। इस दुनिया के शोर मे, अपनी आवाज खो देते है.. हर गली बिकती उन जुठी खुशी और तारिफो मे, खुद की सच्ची खुशियां खो देते है..।। फिर अकेलेपन मे कैद हो कर, ये सवाल करते है खुद से, कि इस दुनिया की भीड़ में मेने खुद को क्यु खो दिया..।।।
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