छुपा ले मुझे समाज के इन तीखी नजरों से जो हर कदम पर मेरे पीछे घूमे अपने नादान सवालों में जिनका जवाब दिल चाहकर भी नहीं ढूंढ पा रहा अपने मकसद के इस बेगैरत खोज में।