फैसला
किससे कहें हम किसकी सुने हम किसी ने मन को रौंदा कोई मनमीत बनता है पर कहना तो होगा किसी से पर किससे कहें हम कह भी दें और वो न समझे तो फिर क्या करें हम। इतना बोझ लिए कैसे बढ़े हम इस दर्द के साथ कैसे जिएं हम कोई तो बताओ उपाय क्या करें हम कौन है मेरा अपना कौन बैरी कैसे चुने हम। हमीं हैं हमारे मनमीत अब ना करेंगे हम किसी से प्रीत इस मायावी दुनिया की माया को चीर बटोरेंगें खुशियां और पाएंगे अंतरिक्ष।
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