लिख दू मौत
दिल्ली दरबार, कर्तव्य पथ ✍️ तिलक राज योगी बता कलम क्या लिखूं खेत, किसान, बीज, बारिश या ऋण या लिख दू मौत। फिर धरा से अंकुरित होगा नवपल्लव खिलेगा धरा पर जोर से संघर्ष होगा जीवन या मरण का बता कलम क्या लिखूं खेत, किसान, बीज, बारिश या ऋण या लिख दू मौत। खेत को बांधा मेड से खेती का जाल बुनना हैं। पहले ऋण के जाल में फंस जाऊ क्या दाम मिलेगा मेरी फसल का या होगा संघर्ष जीवन या मरण का बता कलम क्या लिखूं खेत, किसान, बीज, बारिश या ऋण या लिख दू मौत। सफ़ेद कुर्ता पहन उतरो खेत खेत की बांधो मेड क्या हुआ हाथ मिट्टी से सने, लकीरें मिटी अब जाओ दिल्ली संघर्ष होगा , जीवन होगा या मरण होगा बता कलम क्या लिखूं खेत, किसान, बीज, बारिश या ऋण या लिख दू मौत। सही दाम अनाज न बिका मौत आ गई आंगन में संसद भी जोर से गूंज उठी मौत, मौत, मौत फिर सन्नाटा बता कलम क्या लिखूं खेत, किसान, बीज, बारिश या ऋण या लिख दू मौत।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
